न्यायकुमुद चंद्रिका
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श्री अकलंक भट्ट कृत लघीयस्त्रयपर आ.प्रभाचंद्र (ई.950-1020) द्वारा रचित टीका। इसमें 7 परिच्छेद हैं। (ती./2/306)
Tag:ग्रंथ
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