भूतकाल प्रभु आपका, वह मेरा वर्तमान | वर्तमान जो आपका, वह भविष्य मम जान |
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आम्नाय का अर्थ "परंपरा" या "वंश" होता है, और इस संदर्भ में, यह उस आध्यात्मिक वंश का प्रतीक है जो आचार्य कुन्दकुन्द की शिक्षाओं को अपना आधार मानता है। दिगंबर परंपरा में आचार्य कुन्दकुन्द का स्थान भगवान महावीर और उनके गणधर गौतम स्वामी के ठीक बाद अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है।
आचार्य कुन्दकुन्द दिगम्बर जैन परम्परा के एक महान आचार्य थे, जिन्हें भगवान महावीर और Gautam Ganadhar के बाद श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। उन्होंने समयसार, नियमसार और प्रवचनसार जैसे अनेक महत्वपूर्ण जैन ग्रंथों की रचना की, जो आज भी जैन दर्शन के अनुयायियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
उन्हें 'कलिकाल सर्वज्ञ' (इस युग के सर्वज्ञ) की उपाधि से भी विभूषित किया जाता है, क्योंकि माना जाता है कि उन्होंने जैन आगमों के मूल सार को संरक्षित और पुनर्जीवित किया। उनके द्वारा रचित शास्त्र आज भी दिगम्बर जैन परम्परा के लिए सर्वोच्च प्रमाण माने जाते हैं और वे आत्म-अनुभूति तथा मोक्ष मार्ग के गहरे सिद्धांतों को स्पष्ट करते हैं।
बीसवीं सदी के एक अत्यंत प्रभावशाली और क्रांतिकारी जैन आध्यात्मिक संत एवं विचारक थे। उन्हें विशेष रूप से आचार्य कुन्दकुन्द के महान ग्रंथ 'समयसार' पर दिए गए उनके प्रवचनों के लिए जाना जाता है, जिन्होंने जैन समुदाय में अध्यात्म की एक नई लहर पैदा की।
सभी प्रवचन देखें →आध्यात्मिक उन्नति और स्वाध्याय में आपकी सहायता के लिए बनाए गए उपकरणों का एक व्यापक संग्रह।
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